शारदीय नवरात्र के छठे दिन उमड़ा आस्था का सैलाब, 14 कोस के क्षेत्र में कुलदेवी के रूप में पूजित हैं मां शीतला
जौनपुर। शारदीय नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को विकासखंड सुईथाकला के देवी धाम बसौली में मां शीतला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। भोर में चार बजे से पहले ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दिनभर में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में मत्था टेककर दर्शन-पूजन और अर्चन किया। मां के प्रति भक्तों की अटूट आस्था और दर्शन को लेकर उनका उत्साह मंदिर परिसर में साफ नजर आया।
मुख्य पुजारी पंडित रमेश तिवारी ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मां कात्यायनी की आराधना से साहस, आत्मविश्वास और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए विधि-विधान से पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। मां शीतला 14 कोस के क्षेत्र में कुलदेवी के रूप में विख्यात हैं।
जौनपुर के पश्चिमांचल में सुल्तानपुर की सीमा से सटा देवी धाम बसौली आसपास के क्षेत्र सहित पड़ोसी जनपदों के लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पुजारी रमेश तिवारी के अनुसार, श्रद्धालु निष्काम भाव से मां की शरण में पहुंचते हैं और उनकी कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होने का विश्वास रखते हैं।
सहायक पुजारी पंडित शैलेश गिरी ने बताया कि चैत्र और शारदीय नवरात्र में देवी धाम में दर्शन-पूजन के लिए स्थानीय क्षेत्र के साथ पड़ोसी जनपदों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। उन्होंने कहा कि जगत जननी मां शीतला की आराधना श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
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