जौनपुर: यमदग्निपुरम पावन धरती की पहचान को पुनर्जीवित करना हम सभी का दायित्व : शांतनु महाराज


श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रीकृष्ण-सत्यभामा विवाह व नवधा भक्ति का प्रसंग  सुन श्रोता भाव-विभोर 


 जौनपुर। सुइथाकला विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत सुइथाकला गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को भक्तिमय वातावरण में हुआ। यहां भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर आचार्य शांतनु जी महाराज ने “मेरा कोई न सहारा बिन तेरे”, हर हाल में खुश रहना संतों से सीख जाएं जैसे भावपूर्ण भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण, जामवंत और सत्यभामा के विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
आचार्य शांतनु जी महाराज ने नवधा भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में सच्ची शांति और आनंद केवल भक्ति मार्ग से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की प्राचीन पहचान को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। विदेशी आक्रांताओं ने भारत की संस्कृति और विरासत को नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन आज समय है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और अपने शास्त्रों एवं ग्रंथों में रुचि उत्पन्न करें।
उन्होंने जौनपुर को महर्षि यमदग्नि की पावन भूमि बताते हुए इसे “यमदग्निपुरम” की संज्ञा दी और कहा कि इस पावन धरती की पहचान को पुनर्जीवित करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे शास्त्रों के प्रति श्रद्धा भाव रखें और सनातन संस्कृति को अपनाएं।
कथा के समापन पर मुख्य यजमान यमुना प्रसाद सिंह एवं इंद्रावती सिंह का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर कृष्ण कुमार मुन्ना ब्लॉक प्रमुख, अजय मिश्रा, परसनाथ यादव, अरविंद यादव, संजय सिंह (भाजपा नेता), पत्रकार कैलाश सिंह, डॉ. रमेश सिंह, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. उमेश सिंह, अनिल सिंह, इंजीनियर चंदन निषाद, संजीव, संदीप सिंह, रणविजय सिंह, मधुलता सिंह, अजीत सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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