जौनपुर। दिनांक 8 अप्रैल, 2026 को राजभवन सचिवालय, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर ने सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में किये जा रहे प्रेरणादायी पहल के अंतर्गत राजकीय बालिका गृह, रामनगर, वाराणसी का शैक्षणिक एवं संवेदनशील भ्रमण किया। यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. वंदना सिंह के संरक्षण एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की टीम ने बालिका गृह में निवासरत बालिकाओं के जीवन के विभिन्न आयामों—शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, मानसिक सुदृढ़ता एवं पुनर्वास—का गहन अध्ययन एवं मूल्यांकन किया। भ्रमण का उद्देश्य केवल व्यवस्थाओं का अवलोकन करना ही नहीं, बल्कि यह भी था कि विश्वविद्यालय किस प्रकार पॉक्सो अधिनियम एवं अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में संरक्षण प्राप्त कर रही बालिकाओं के पुनर्वास, मनोवैज्ञानिक सशक्तिकरण, कौशल विकास तथा सामाजिक पुनर्स्थापन में प्रभावी योगदान दे सकता है।
भ्रमण दल का नेतृत्व अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने किया। उनके साथ उपकुलसचिव श्रीमती बबीता, अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान विभाग की डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव एवं डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान की शोध छात्रा एवं वरिष्ठ नैदानिक मनोवैज्ञानिक पायल एवं श्री दिवाकर शर्मा उपस्थित रहे। संरक्षणगृह की प्रभारी संगीता राय, परामर्शदाता दीपिका सिंह एवं उनकी टीम ने विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संपूर्ण परिसर का विस्तृत निरीक्षण कराया तथा आवास, पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श सेवाएं, शैक्षणिक गतिविधियां एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समग्र जानकारी प्रदान की।
विश्वविद्यालय टीम ने बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद स्थापित कर उनकी शैक्षणिक अभिरुचि, मानसिक स्वास्थ्य, भविष्य की आकांक्षाओं एवं पुनर्वास से जुड़ी आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया। इस दौरान टीम ने उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु नियमित रूप से शैक्षणिक परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, व्यक्तित्व विकास सत्र एवं कौशल उन्नयन कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन में सदैव अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के सहयोग से बालिकाओं के शैक्षणिक उन्नयन, करियर मार्गदर्शन, मानसिक परामर्श एवं पुनर्वास कार्यक्रमों में निरंतर सहयोग प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर बालिका गृह की प्रभारी संगीता राय ने विश्वविद्यालय की इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से संरक्षण गृह में रह रही बालिकाओं के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने भविष्य में संयुक्त रूप से जागरूकता अभियानों, प्रशिक्षण सत्रों एवं कार्यशालाओं के आयोजन पर भी सहमति व्यक्त की।
भ्रमण के समापन पर विश्वविद्यालय टीम ने संरक्षण गृह की व्यवस्थाओं का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत दिया तथा बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। मा कुलाधिपति श्रीमती आनंदी बेन पटेल जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा किया जा रहा यह पहल शैक्षणिक संस्थाओं के न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि समाज के संवेदनशील वर्गों के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का भी सशक्त परिचायक है।
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