वाराणसी। काशी विद्वत्परिषद् के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. रामयत्न शुक्ल का 92 वर्ष की अवस्था में मंगलवार की शाम निधन हो गया। उन्होंने वाराणसी अस्पताल में अंतिम सांस ली। करीब हफ्तेभर पूर्व ब्रेन हेमरेज के बाद उन्हें भर्ती कराया गया था। सोमवार को स्थिति गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया था। उनकी अंतिम यात्रा शंकुलधारा पोखरा स्थित आवास से निकली। अंतिम संस्कार हरिश्चंद्रघाट पर हुआ। मुखाग्नि बड़े पुत्र रामाश्रय शुक्ल ने दी।
वह सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के अध्यक्ष तथा संकाय प्रमुख रहे। बीएचयू में भी उन्होंने शिक्षण कार्य किया। उन्हें वर्ष 1999 में राष्ट्रपति सम्मान, 2015 में विश्व भारती सम्मान और 2021 में पद्मश्री सहित अनेक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हुए थे। भारत के अनेक धर्माचार्यों के शिक्षागुरु तथा देश ही नहीं विश्व में संस्कृत भाषा तथा पारम्परिक शास्त्रों के संरक्षण संवर्धन में योगदान देने वाले आचार्य शुक्ल का निधन अपूर्णीय क्षति है। उनके शोक संतप्त परिवार में दो पुत्र डॉ. रामाश्रय शुक्ल व भोलानाथ शुक्ल तथा दो पुत्रियां हैं। उनके निधन की सूचना पर देशभर के संस्कृत विद्वानों ने शोक है। सभी संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने फोन कर शोक व्यक्त किया। काशी विद्वत्परिषद् के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि उनके निधन से संस्कृत परम्परा की कड़ी टूट गई।

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