बसौली धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सातवें दिन 65000 से अधिक भक्तों ने किए दर्शन
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर, मां कालरात्रि की भक्ति में लीन रहे श्रद्धालु
सुईथाकला। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन बुधवार को सुईथाकला क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध देवीधाम बसौली में श्रद्धा और भक्ति का भव्य दृश्य देखने को मिला। मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के पावन अवसर पर 6500 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर सुख, शांति और संकटों से मुक्ति की कामना की।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर शाम तक जारी रहीं। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर अपने परिवार की खुशहाली और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की। पूरे दिन ‘जय माता दी’, 'बसौली माई की जय' के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नवरात्रि के सातवें दिन महिलाओं, युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, दुर्गा सप्तशती पाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
देवीधाम बसौली के मुख्य पुजारी पं. रमेश तिवारी ने बताया कि नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि मां कालरात्रि को दुष्टों का संहार करने वाली और भय का नाश करने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और उन्हें निर्भयता तथा साहस का वरदान प्राप्त होता है।
पं. तिवारी ने कहा कि सच्चे मन और श्रद्धा से मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति को सुख-समृद्धि, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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