बसौली धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, पांचवें दिन 5000 से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर, मां स्कंदमाता की आराधना में लीन रहे भक्त
सुईथाकला, जौनपुर। चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन सोमवार को सुईथाकला क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध देवीधाम बसौली में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। मां स्कंदमाता की पूजा के इस विशेष दिन पर 5000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर शाम तक जारी रहीं। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में मत्था टेककर परिवार की खुशहाली और मंगलकामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंजता रहा, जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नवरात्रि के पांचवें दिन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला। भजन-कीर्तन और दुर्गा सप्तशती पाठ से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा व व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
देवीधाम बसौली के मुख्य पुजारी पंडित रमेश तिवारी ने बताया कि नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और उनकी गोद में विराजमान स्कंद जी भक्तों को साहस, शक्ति और ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मां कमल के आसन पर विराजती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
पं. तिवारी ने बताया कि जो भक्त सच्चे मन से मां स्कंदमाता की आराधना करता है, उसके जीवन से भय, दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उसे मोक्ष के मार्ग की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।



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