बेटी को पढ़ा-लिखाकर आईएएस बनाने वाले पिता के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को किया याद
जौनपुर। आईएएस अधिकारी प्रतिभा वर्मा के पिता एवं बाबा भगवान दास आदर्श इंटर कॉलेज विकवाजितपुर, सुल्तानपुर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुइथाकला के गैरवाह निवासी स्वर्गीय सुबंश वर्मा को रविवार को श्रद्धांजलि दी गई। सभा में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर शिक्षा और समाज के प्रति योगदान को याद किया गया। विशेष रूप से बेटी प्रतिभा वर्मा को शिक्षित कर आईएएस अधिकारी बनाने के उनके प्रयास को प्रेरणादायी बताया गया। इस दौरान जरूरतमंदों को वस्त्र व उपयोगी सामग्री वितरित की गई।
अंबेडकरनगर के प्रगतिशील किसान चंद्रेश वर्मा ने मृत्यु भोज को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसके बहिष्कार की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी परिजन के निधन से परिवार पहले ही शोक और मानसिक पीड़ा में होता है। ऐसे समय में परंपरा के नाम पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भोज खुशी के अवसर पर होना चाहिए, जबकि शोक के समय मृतक की स्मृति में गरीबों की मदद, बच्चों की शिक्षा या अन्य समाजोपयोगी कार्य किए जाने चाहिए।
पत्रकार रामनरेश प्रजापति ने कहा कि सुबंश वर्मा ने शिक्षा को जीवन का आधार मानते हुए अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर आईएएस अधिकारी बनाया। उनका जीवन क्षेत्र के अभिभावकों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देकर गांव की प्रतिभाओं को सिविल सेवा, चिकित्सा, न्याय, विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सुबंश वर्मा की पत्नी एवं भदैया विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय बभनगवां प्रथम की प्रधानाध्यापक ऊषा वर्मा ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। कहा कि उनका निधन परिवार के साथ शिक्षा जगत और समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति है।
मंशाराम वर्मा, हरिवंश वर्मा और हौसिला प्रसाद वर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन चंद्रभूषण पटेल ने किया। चंद्रेश वर्मा ने सहयोग किया।
सुबंश वर्मा का 31 अगस्त को बीमारी के चलते लखनऊ स्थित अपोलो अस्पताल में निधन हुआ था। मौके पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में सुधीर वर्मा, अभिषेक वर्मा, डॉ. प्रियंका वर्मा, विनय कुमार वर्मा, भोले वर्मा, रामशिरोमणि वर्मा, विंदे, महेश, जयचंद, राम अक्षयबर, दिवाकर, शीतला प्रसाद, ठाकुर प्रसाद, देवी प्रसाद, उदयराज, सुनील वर्मा, शोभनाथ वर्मा और दुर्गा प्रसाद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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