व्यक्तित्व विकास के साथ रुचि और क्षमता के अनुरूप करियर चुनें : प्रो. अजय प्रताप सिंह
जौनपुर। मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज, जौनपुर के मनोविज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को “Personality Development & Career Counselling: A Psychological Perspective” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संप्रेषण कौशल तथा करियर चयन के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपनी रुचि, योग्यता, क्षमता एवं व्यक्तित्व विशेषताओं के अनुरूप भविष्य के करियर का चुनाव करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर खान द्वारा अतिथि एवं विषय-विशेषज्ञ का स्वागत करते हुए किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सही करियर मार्गदर्शन भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से सेमिनार में दी जाने वाली जानकारी को अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में उपयोग करने का आह्वान किया।
सेमिनार में मुख्य विषय-विशेषज्ञ के रूप में प्रो. अजय प्रताप सिंह, विभागाध्यक्ष, व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने व्यक्तित्व विकास और करियर निर्माण के विभिन्न मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने व्याख्यान में प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रभावी व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संप्रेषण कौशल और सही निर्णय लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि करियर का चुनाव केवल दूसरे लोगों की देखा-देखी या सामाजिक दबाव में नहीं करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को सबसे पहले अपनी रुचि, योग्यता, क्षमता, व्यक्तित्व एवं लक्ष्य को समझना चाहिए और उसी के आधार पर अपने भविष्य की दिशा निर्धारित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के समय में करियर के क्षेत्र लगातार बदल रहे हैं और विद्यार्थियों के सामने पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ अनेक नए अवसर भी उपलब्ध हैं। ऐसे में सही जानकारी और उचित करियर काउंसलिंग विद्यार्थियों को अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर विकल्प चुनने में सहायता कर सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने भीतर मौजूद क्षमताओं को पहचानने, कमजोरियों पर कार्य करने तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. सिंह ने व्यक्तित्व विकास को केवल बाहरी व्यक्तित्व तक सीमित न मानते हुए इसके मानसिक एवं व्यवहारिक पक्षों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का आत्मविश्वास, व्यवहार, सोचने का तरीका, दूसरों के साथ संवाद करने की क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की योग्यता उसके व्यक्तित्व को प्रभावी बनाती है। विद्यार्थियों को इन सभी क्षेत्रों में निरंतर सुधार के लिए प्रयास करना चाहिए।
सेमिनार के दौरान विद्यार्थियों ने करियर चयन, व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, भविष्य की संभावनाओं और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। विषय-विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। संवादात्मक सत्र के कारण विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की और विषय को व्यावहारिक रूप से समझने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की शिक्षिकाएं डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव एवं डॉ. अंकिता श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव एवं डॉ. अमित कुमार जायसवाल सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं अंशुमान, हर्ष, आदिल आदि ने भी सेमिनार में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन सुमित सिंह ने किया।
रील प्रतियोगिता के विजेताओं को किया गया सम्मानित
सेमिनार के दौरान मनोविज्ञान विभाग द्वारा पूर्व में आयोजित “Psychology in Action: Reel Competition” के विजेता छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के साथ मेडल प्रदान किए गए। वहीं प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन स्वरूप सांत्वना पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा मनोविज्ञान जैसे विषय को रचनात्मक एवं आधुनिक माध्यम यानी रील के माध्यम से प्रस्तुत करने के प्रयास की सराहना की गई। शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता, अभिव्यक्ति की क्षमता, टीम भावना और विषय को व्यावहारिक रूप से समझने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती हैं।
कार्यक्रम के अंत में मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ममता सिंह ने विषय-विशेषज्ञ प्रो. अजय प्रताप सिंह को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने सेमिनार में महत्वपूर्ण जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रो. सिंह के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की सीमाओं से बाहर निकलकर विषय के व्यावहारिक एवं मनोवैज्ञानिक पक्षों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण एवं गरिमापूर्ण वातावरण में हुआ।

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